अब कहीं दिखाई नहीं देती
सीमेंट -पत्थर की ऊंची इमारतों
कंक्रीट की काली सड़कों के बीच
ज़मीन जैसे कहीं खो गई है।
बारिश का ढेर सारा पानी सोख
मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू
कई दिनों से नहीं महकी।
कई दिनों से नहीं बना गोल पिल्लू
सो जुटा नहीं कंचों की रंग-बिरंगी
गोलियों का खेल।
गुल्ली-डंडा,छुपम-छुपाई
धरती की धुरी पर जाने कब से
नहीं चली लट्टू की कील
हंसी नहीं धरती
नन्हे कदमों के हुड़दंग से
सुना है आजकल बचपन
मिट्टी में नहीं लोटता
सीमेंट के चिकने फ़र्श पर
प्लास्टिक के रंग-बिरंगे खिलौनों के बीच
धरती की धनक से दूर
कंप्यूटर के छोटे-छोटे बटनों पर
बचपन खेलता है
बड़ों के खेल।
डाॅ. सरोज अंथवाल
(माँ के हिस्से का युद्ध)
सीमेंट -पत्थर की ऊंची इमारतों
कंक्रीट की काली सड़कों के बीच
ज़मीन जैसे कहीं खो गई है।
बारिश का ढेर सारा पानी सोख
मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू
कई दिनों से नहीं महकी।
कई दिनों से नहीं बना गोल पिल्लू
सो जुटा नहीं कंचों की रंग-बिरंगी
गोलियों का खेल।
गुल्ली-डंडा,छुपम-छुपाई
धरती की धुरी पर जाने कब से
नहीं चली लट्टू की कील
हंसी नहीं धरती
नन्हे कदमों के हुड़दंग से
सुना है आजकल बचपन
मिट्टी में नहीं लोटता
सीमेंट के चिकने फ़र्श पर
प्लास्टिक के रंग-बिरंगे खिलौनों के बीच
धरती की धनक से दूर
कंप्यूटर के छोटे-छोटे बटनों पर
बचपन खेलता है
बड़ों के खेल।
डाॅ. सरोज अंथवाल
(माँ के हिस्से का युद्ध)
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